श्रीगजानन बोले - हे राजन्! मेरी कृपा से तुम्हारी बुद्धि निर्मल और स्थिर हो गयी है, सुनो, मैं योगामृत से परिपूर्ण गीता तुमसे कहता हूँ।
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