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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 46
मताहंकृती त्यक्त्वा सर्वान्कामांश्च यस्त्यजेत् । नित्यं ज्ञानरतो भूत्वा ज्ञानान्मुक्तिं स यास्यति ॥
जो ममत्व, अहंकार और सब कामनाओं का त्याग करता है, नित्य ज्ञान में मग्न रहता है, वह ज्ञान से मुक्ति को प्राप्त हो जाता है।
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