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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 44
सरितां पतिमायान्ति वनानि सर्वतो यथा । आयान्ति यं तथा कामा न स शान्तिं क्वचिल्लभेत् ॥
जिस प्रकार से (नदियों आदि के) सभी जल समुद्र में प्रवेश कर जाते हैं और उसकी तृप्ति नहीं होती, इसी प्रकार सब कामना पूर्ण होने वाले को भी शान्ति नहीं होती।
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