सरितां पतिमायान्ति वनानि सर्वतो यथा ।
आयान्ति यं तथा कामा न स शान्तिं क्वचिल्लभेत् ॥
जिस प्रकार से (नदियों आदि के) सभी जल समुद्र में प्रवेश कर जाते हैं और उसकी तृप्ति नहीं होती, इसी प्रकार सब कामना पूर्ण होने वाले को भी शान्ति नहीं होती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।