व्यास उवाच
अथ गीतां प्रवक्ष्यामि योगमार्गप्रकाशिनीम् ।
नियुक्ता पृच्छते सूत राज्ञे गजमुखेन या ॥
व्यासजी बोले - हे सूतजी! योगमार्ग को प्रकाशित करने वाली गीता का अब तुमसे वर्णन करता हूँ, जिसको राजा वरेण्य के पूछने पर सम्पूर्ण विघ्नों के नाशक गणेशजी ने कहा था।
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