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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 35
विपश्चिद्यतते भूप स्थितिमास्थाय योगिनः । मन्थयित्वेन्द्रियाण्यस्य हरन्ति बलतो मनः ॥
हे राजन्! इन्द्रियगण मोक्ष के लिये प्रयत्न करने वाले, विद्वान् पुरुष का भी मन बलात् हर लेती हैं। इस कारण बुद्धिमान् पुरुष को इन्द्रियों को वश में करने का यत्न करना चाहिये।
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