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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 34
व्यावर्तन्तेऽस्य विषयास्त्यक्ताहारस्य वर्ष्मिणः । विना रागं च रागोऽपि दृष्ट्वा ब्रह्म विनश्यति ॥
भोजन त्यागने वाले साधक के विषय तो नष्ट हो जाते हैं, परंतु उनका अनुभव बना रहता है। ब्रह्म की प्राप्ति होने से वह राग भी नष्ट हो जाता है।
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