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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 30
त्रयीविप्रतिपन्नस्य स्थाणुत्वं यास्यते यदा । परात्मन्यचला बुद्धिस्तदासौ योगमाप्नुयात् ॥
जब तीनों वेदों में प्रतिपादित किये गये सकाम कर्म से यह बुद्धि पूर्णतः और परमात्मा में लगकर निश्चल हो जाती है, तब इस प्राणी को योग की प्राप्ति होती है।
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