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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 3
येनामृतमयो भूत्वा पुमान् ब्रह्मामृतं यतः । योगामृतं महाभाग तन्मे करुणया वद ॥
जिस अमृत को पाकर मनुष्य ब्रहारूप हो जाते हैं, हे महाभाग! उस योगामृत का कृपाकर आप मुझसे वर्णन कीजिये।
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