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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 29
यदा ह्यज्ञानकालुष्यं जन्तोर्बुद्धिः क्रमिष्यति । तदासौ याति वैराग्यं वेदवाक्यादिषु क्रमात् ॥
जब इस प्राणी की बुद्धि अविद्या के अन्धकार से - अविद्या से रहित होगी, तब क्रम से इस प्राणी का सकाम वेदवाक्यादिकों में वैराग्य हो जाता है।
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