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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 28
धर्माधर्मफले त्यक्त्वा मनीषी विजितेन्द्रियः । जन्मबन्धविनिर्मुक्तः स्थानं संयात्यनामयम् ॥
जितेन्द्रिय और बुद्धिमान् व्यक्ति धर्म और अधर्म के फल का त्याग करके जन्म-बन्धन से मुक्त होकर अनामय परमपद को प्राप्त होता है।
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