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गणेशगीता • अध्याय 1 • श्लोक 27
धर्माधरमौ जहातीह तया युक्त उभावपि । अतो योगाय युञ्जीत योगो वैधेषु कौशलम् ॥
उसी बुद्धि के न होने से यह प्राणी धर्म-अधर्म का त्याग कर देता है, इस कारण योग में बुद्धि लगाना उचित है, कर्तव्य कर्मों में कुशलता ही योग है।
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