आत्मानात्मविवेकेन या बुद्धिर्दैवयोगतः ।
स्वधर्मासक्तचित्तस्य तद्योगो योग उच्यते ॥
अपने धर्म में आसक्त चित्त वाले प्राणी की दैव योग से जो आत्मा और अनात्मा के विचार की बुद्धि उत्पन्न होती है, उस बुद्धि के योग का ही नाम योग है।
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