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दुर्गासप्तशती • अध्याय 9 • श्लोक 54
मच्छस्त्रपातसम्भूतान् रक्तबिन्दून् महासुरान् । रक्तबिन्दोः प्रतीच्छ त्वं वक्त्रेणानेन वेगिना ॥
मेरे शस्त्रों के प्रहार से जो रक्त की बूंदें गिरें और उनसे जो महान असुर उत्पन्न हों, उन्हें तुम शीघ्र ही अपने मुख से ग्रहण कर लो।
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