तस्याहतस्य बहुधा शक्तिशूलादिभिर्भुवि । पपात यो वै रक्तौघस्तेनासञ्छतशोऽसुराः ॥
जब उसे शक्तियों, शूलों आदि से अनेक प्रकार से घायल किया गया, तब उसके शरीर से जो रक्तधारा पृथ्वी पर गिरी उससे सैकड़ों असुर उत्पन्न हो गए।
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