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दुर्गासप्तशती • अध्याय 9 • श्लोक 47
वैष्णवी समरे चैनं चक्रेणाभिजघान ह । गदया ताडयामास ऐन्द्री तमसुरेश्वरम् ॥
युद्ध में वैष्णवी ने उसे अपने चक्र से आहत किया और ऐन्द्री ने उस असुरराज को गदा से प्रहार किया।
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