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दुर्गासप्तशती • अध्याय 9 • श्लोक 43
कुलिशेनाहतस्याशु बहु सुस्राव शोणितम् । समुत्तस्थुस्ततो योधास्तद्रूपास्तत्पराक्रमाः ॥
वज्र से आहत होते ही उसके शरीर से बहुत रक्त बहने लगा, और उस रक्त से उसी के समान रूप और पराक्रम वाले अनेक योद्धा उत्पन्न हो गए।
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