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दुर्गासप्तशती • अध्याय 9 • श्लोक 35
ऐन्द्री कुलिशपातेन शतशो दैत्यदानवाः । पेतुर्विदारिताः पृथ्व्यां रुधिरौघप्रवर्षिणः ॥
ऐन्द्री के वज्र के प्रहार से सैकड़ों दैत्य और दानव विदीर्ण होकर पृथ्वी पर गिर पड़े और उनसे रक्त की धाराएँ बहने लगीं।
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