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दुर्गासप्तशती • अध्याय 9 • श्लोक 21
वज्रहस्ता तथैवैन्द्री गजराजोपरि स्थिता । प्राप्ता सहस्रनयना यथा शक्रस्तथैव सा ॥
वज्र धारण करने वाली ऐन्द्री भी हाथी पर आरूढ़ होकर वहाँ पहुँची। वह सहस्र नेत्रों वाली थी, जैसे स्वयं इन्द्र होते हैं।
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