शिरश्चण्डस्य काली च गृहीत्वा मुण्डमेव च । प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम् ॥
काली ने चण्ड और मुण्ड दोनों के सिर पकड़कर चण्डिका के पास जाकर प्रचण्ड अट्टहास के साथ कहा।
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