तत्परित्राणदः कश्चिद्यदि वोत्तिष्ठतेऽपरः । स हन्तव्योऽमरो वापि यक्षो गन्धर्व एव वा ॥
यदि कोई उसे बचाने के लिए उठ खड़ा हो—चाहे वह देवता हो, यक्ष हो या गन्धर्व—उसे भी मार डालना।
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