॥ स्वस्ति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये शुम्भनिशुम्भसेनानीधूम्रलोचनवधो नाम षष्ठोऽध्यायः । उवाच ४, श्लोकाः २४, एवमादितः ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वन्तर में स्थित देवीमाहात्म्य का “शुम्भ-निशुम्भ के सेनापति धूम्रलोचन का वध” नामक छठा अध्याय समाप्त होता है।
इसमें ४ उवाच और २४ श्लोक हैं।
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