॥ स्वस्ति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये देव्या दूतसंवादो नाम पञ्चमोऽध्यायः । उवाच ९, त्रिपान्मन्त्राः ६६, श्लोकाः ५४, एवमादितः ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वन्तर में स्थित देवीमाहात्म्य का “देव्या दूतसंवाद” नामक पाँचवाँ अध्याय समाप्त होता है।
इसमें ९ उवाच, ६६ त्रिपाद मन्त्र और ५४ श्लोक बताए गए हैं।
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