स त्वं गच्छ मयोक्तं ते यदेतत्सर्वमादृतः । तदाचक्ष्वासुरेन्द्राय स च युक्तं करोतु यत् ॥
इसलिए तुम जाओ और मेरी कही हुई बात असुरराज को आदरपूर्वक कह देना, फिर वह जो उचित समझे वही करे।
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