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दुर्गासप्तशती • अध्याय 6 • श्लोक 82
सा त्वं गच्छ मयैवोक्ता पार्श्वं शुम्भनिशुम्भयोः । केशाकर्षणनिर्धूतगौरवा मा गमिष्यसि ॥
इसलिए मेरी बात मानकर तुम शुम्भ और निशुम्भ के पास चलो, अन्यथा केश पकड़कर घसीटे जाने से तुम्हारा सम्मान नष्ट हो जाएगा।
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