इन्द्राद्याः सकला देवास्तस्थुर्येषां न संयुगे । शुम्भादीनां कथं तेषां स्त्री प्रयास्यसि सम्मुखम् ॥
जिन शुम्भ आदि के सामने इन्द्र आदि सभी देवता युद्ध में नहीं ठहर सके, उनके सामने तुम स्त्री होकर कैसे जाओगी?
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