तदागच्छतु शुम्भोऽत्र निशुम्भो वा महाबलः । मां जित्वा किं चिरेणात्र पाणिं गृह्णातु मे लघु ॥
अतः शुम्भ या महाबली निशुम्भ यहाँ आएँ और मुझे युद्ध में जीतकर बिना विलम्ब मेरे हाथ को स्वीकार करें।
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