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दुर्गासप्तशती • अध्याय 6 • श्लोक 72
इत्युक्ता सा तदा देवी गम्भीरान्तःस्मिता जगौ । दुर्गा भगवती भद्रा ययेदं धार्यते जगत् ॥
इस प्रकार कहे जाने पर वह देवी, जो दुर्गा, भगवती और भद्रा हैं तथा जिनसे यह जगत धारण किया जाता है, भीतर ही भीतर मुस्कुराकर बोलीं।
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