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दुर्गासप्तशती • अध्याय 6 • श्लोक 67
यानि चान्यानि देवेषु गन्धर्वेषूरगेषु च । रत्नभूतानि भूतानि तानि मय्येव शोभने ॥
हे सुन्दरी! देवताओं, गन्धर्वों और नागों के पास जो भी अन्य रत्न हैं, वे सब अब मेरे ही पास शोभा पा रहे हैं।
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