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दुर्गासप्तशती • अध्याय 6 • श्लोक 64
मम त्रैलोक्यमखिलं मम देवा वशानुगाः । यज्ञभागानहं सर्वानुपाश्नामि पृथक् पृथक् ॥
सम्पूर्ण त्रैलोक्य मेरा है और सभी देवता मेरे अधीन हैं। सभी यज्ञों के भाग भी मैं ही अलग-अलग ग्रहण करता हूँ।
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