एवं दैत्येन्द्र रत्नानि समस्तान्याहृतानि ते । स्त्रीरत्नमेषा कल्याणी त्वया कस्मान्न गृह्यते ॥
हे दैत्येन्द्र! इस प्रकार सभी रत्न आपके पास आ चुके हैं। यह कल्याणमयी स्त्रीरत्न भी क्यों न आप स्वीकार करें?
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