साब्रवीत्तान् सुरान् सुभ्रूर्भवद्भिः स्तूयतेऽत्र का । शरीरकोशतश्चास्याः समुद्भूताब्रवीच्छिवा ॥
सुन्दर भौंहों वाली पार्वती ने देवताओं से पूछा—“यहाँ तुम किसकी स्तुति कर रहे हो?” तभी उनके शरीर से एक दिव्य रूप प्रकट हुआ और उसने कहा।
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