पूर्वकाल में जिनकी देवताओं ने अपनी इच्छाओं की सिद्धि के लिए स्तुति की थी और जिनकी इन्द्र ने सेवा की थी—वही ईश्वरी हमारे लिए शुभ का कारण बनें और हमारी सभी आपत्तियों का नाश करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।