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दुर्गासप्तशती • अध्याय 5 • श्लोक 43
। ह्रीं ॐ । स्वस्ति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये शक्रादिस्तुतिर्नाम चतुर्थोऽध्यायः । उवाच ५, अर्धश्लोकौ २, श्लोकाः ३५, एवमादितः ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वन्तर में स्थित देवीमाहात्म्य का “शक्रादि स्तुति” नामक चतुर्थ अध्याय समाप्त होता है। इसमें ५ उवाच, २ अर्धश्लोक और ३५ पूर्ण श्लोक बताए गए हैं।
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