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दुर्गासप्तशती • अध्याय 5 • श्लोक 37
तस्य वित्तर्द्धिविभवैर्धनदारादिसम्पदाम् । वृद्धयेऽस्मत्प्रसन्ना त्वं भवेथाः सर्वदाम्बिके ॥
हे अम्बिके! आप उस मनुष्य पर प्रसन्न होकर उसके धन, वैभव, संपत्ति, पत्नी और परिवार की वृद्धि करें।
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