केनोपमा भवतु तेऽस्य पराक्रमस्य रूपं च शत्रुभयकार्यतिहारि कुत्र । चित्ते कृपा समरनिष्ठुरता च दृष्टा त्वय्येव देवि वरदे भुवनत्रयेऽपि ॥
हे वरदायिनी देवी! आपके पराक्रम की उपमा किससे दी जा सकती है? आपका रूप शत्रुओं का भय हरने वाला है। आपके हृदय में करुणा और युद्ध में कठोरता—ये दोनों गुण तीनों लोकों में केवल आपमें ही देखे जाते हैं।
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