हे देवी! दुष्ट आचरण को शांत करना ही आपका स्वभाव है। आपका यह रूप अचिन्त्य और अद्वितीय है। जिन असुरों ने देवताओं का पराक्रम छीन लिया था उनका वध करने पर भी आपने शत्रुओं पर दया ही प्रकट की है।
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