मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
दुर्गासप्तशती • अध्याय 5 • श्लोक 2
शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या । तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्गमचारुदेहाः ॥
उस अत्यन्त पराक्रमी दुरात्मा असुर और उसकी सेना के देवी द्वारा मारे जाने पर इन्द्र आदि देवताओं ने अपने सिर झुकाकर अत्यन्त प्रसन्न होकर रोमांचित शरीर से देवी की स्तुति की।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें