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दुर्गासप्तशती • अध्याय 4 • श्लोक 6
सच्छिन्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथिः । अभ्यधावत तां देवीं खड्गचर्मधरोऽसुरः ॥
धनुष टूट जाने, रथ नष्ट होने, घोड़े और सारथि के मारे जाने पर वह असुर तलवार और ढाल लेकर देवी पर झपटा।
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