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दुर्गासप्तशती • अध्याय 4 • श्लोक 45
॥ स्वस्ति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये महिषासुरवधो नाम तृतीयोऽध्यायः उवाच ३, अर्धश्लोकाः ४१, श्लोकाः ४४, एवमादितः ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वन्तर में स्थित देवीमाहात्म्य का “महिषासुर वध” नामक तृतीय अध्याय समाप्त होता है। इसमें ३ उवाच, ४१ अर्धश्लोक और ४४ पूर्ण श्लोक बताए गए हैं।
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