दृष्ट्वा तदापतच्छूलं देवी शूलममुञ्चत । तेन तच्छतधा नीतं शूलं स च महासुरः ॥
उस आते हुए शूल को देखकर देवी ने भी अपना शूल छोड़ा, जिससे उसका शूल और वह महासुर दोनों ही सैकड़ों टुकड़ों में विभक्त हो गए।
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