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दुर्गासप्तशती • अध्याय 3 • श्लोक 50
लीलयैव प्रचिच्छेद निजशस्त्रास्त्रवर्षिणी । अनायस्तानना देवी स्तूयमाना सुरर्षिभिः ॥
देवी ने अपने अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करते हुए उन सबको खेल-खेल में ही काट डाला और बिना किसी परिश्रम के युद्ध करती हुई देवताओं और ऋषियों द्वारा स्तुति की जा रही थीं।
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