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दुर्गासप्तशती • अध्याय 3 • श्लोक 39
दिशो भुजसहस्रेण समन्ताद्व्याप्य संस्थिताम् । ततः प्रववृते युद्धं तया देव्या सुरद्विषाम् ॥
हजारों भुजाओं से दिशाओं को व्याप्त करके खड़ी उस देवी के साथ असुरों का युद्ध आरम्भ हो गया।
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