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दुर्गासप्तशती • अध्याय 3 • श्लोक 19
ततः समस्तदेवानां तेजोराशिसमुद्भवाम् । तां विलोक्य मुदं प्रापुरमरा महिषार्दिताः । ततो देवा ददुस्तस्यै स्वानि स्वान्यायुधानि च ॥
समस्त देवताओं के तेज के समूह से उत्पन्न उस देवी को देखकर महिषासुर से पीड़ित देवताओं को अत्यन्त आनंद हुआ। तब देवताओं ने उसे अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।
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