ततोऽतिकोपपूर्णस्य चक्रिणो वदनात्ततः । निश्चक्राम महत्तेजो ब्रह्मणः शङ्करस्य च ॥
तब अत्यन्त क्रोध से भरे चक्रधारी विष्णु के मुख से तथा ब्रह्मा और शंकर के शरीर से महान तेज प्रकट हुआ।
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