एकार्णवेऽहिशयनात्ततः स ददृशे च तौ । मधुकैटभौ दुरात्मानावतिवीर्यपराक्रमौ ॥
शेषनाग पर एकार्णव में शयन करते हुए विष्णु ने उन दोनों दुष्ट और अत्यन्त पराक्रमी असुरों—मधु और कैटभ—को देखा।
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