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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 91
निर्गम्य दर्शने तस्थौ ब्रह्मणोऽव्यक्तजन्मनः । उत्तस्थौ च जगन्नाथस्तया मुक्तो जनार्दनः ॥
वह देवी प्रकट होकर अव्यक्तजन्मा ब्रह्मा के सामने खड़ी हो गईं। तब उनकी योगनिद्रा से मुक्त होकर जगन्नाथ जनार्दन विष्णु जाग उठे।
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