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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 67
आस्तीर्य शेषमभजत् कल्पान्ते भगवान् प्रभुः । तदा द्वावसुरौ घोरौ विख्यातौ मधुकैटभौ ॥
कल्प के अंत में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन कर रहे थे। उसी समय मधु और कैटभ नाम के दो भयंकर असुर उत्पन्न हुए।
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