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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 55
महामाया हरेश्चैषा तया सम्मोह्यते जगत् । ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ॥
यह भगवान विष्णु की महामाया है, जिससे सम्पूर्ण जगत मोहित हो जाता है। वही भगवती देवी ज्ञानियों के मन को भी मोह में डाल देती हैं।
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