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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 54
महामायाप्रभावेण संसारस्थितिकारिणा । तन्नात्र विस्मयः कार्यो योगनिद्रा जगत्पतेः ॥
यह सब संसार को धारण करने वाली महामाया के प्रभाव से होता है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं, क्योंकि यह जगत्पति की योगनिद्रा है।
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