यतो हि ज्ञानिनः सर्वे पशुपक्षिमृगादयः । ज्ञानं च तन्मनुष्याणां यत्तेषां मृगपक्षिणाम् ॥
क्योंकि पशु, पक्षी और मृग आदि भी अपने-अपने विषयों का ज्ञान रखते हैं। मनुष्यों का ज्ञान भी उसी प्रकार का है जैसा उन पशु-पक्षियों का होता है।
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